मंगल नवग्रह मंत्र
ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
शारीरिक क्षमता और असीमित ऊर्जा की प्राप्ति, आलस्य का नाश और जीवन के हर क्षेत्र में आने वाले विघ्नों के निवारण हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शारीरिक क्षमता और असीमित ऊर्जा की प्राप्ति, आलस्य का नाश और जीवन के हर क्षेत्र में आने वाले विघ्नों के निवारण हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
शारीरिक क्षमता और असीमित ऊर्जा की प्राप्ति, आलस्य का नाश और जीवन के हर क्षेत्र में आने वाले विघ्नों के निवारण हेतु
जाप विधि
मंगलवार प्रातः काल लाल आसन पर बैठकर इक्कीस या एक सौ आठ बार पाठ। 16
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ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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stotra mantraदुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः। विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः।। 7
beej mantraखं
dhyan mantraॐ जटाजूटसमायुक्तमर्धेन्दुकृतलक्षणम्। लोचनत्रयसंयुक्तं पातु मां सर्वतोमुखीम्॥