छिन्नमस्ता (वायु गमन सिद्धि) उग्र मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा
वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश
जाप विधि
इस उग्र साधना को 11 दिनों तक संपन्न किया जाता है। नागरबेल के पत्तों पर वायु गमन छिन्नमस्ता यंत्र स्थापित करें। भगवती के उग्र स्वरूप का ध्यान कर शंख स्थापना करें ('ॐ शंखायै नमः')। दोनों हाथों से शंख पकड़कर आवाहन मंत्र पढ़ें। विनियोग के पश्चात् यंत्र को जल से धोकर 16 कुमकुम की बिंदियां लगाएं और लघु प्राण प्रतिष्ठा करें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर चन्दन-धूप से पूजा करें। पूजा के तुरंत बाद दोनों हाथों से दीपक को बुझा दें। नित्य काले हकीक या रुद्राक्ष की माला से 11 माला जप करें। गुरु दीक्षा अत्यंत अनिवार्य है 7।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्।
mool mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
bhakti mantraजय सीता राम जय जय हनुमान
kaamya mantraॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
gyan mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
sabar mantraक्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18