ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
छिन्नमस्ता (वायु गमन सिद्धि)

छिन्नमस्ता (वायु गमन सिद्धि) उग्र मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा

वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश 7।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश 7।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश

जाप विधि

इस उग्र साधना को 11 दिनों तक संपन्न किया जाता है। नागरबेल के पत्तों पर वायु गमन छिन्नमस्ता यंत्र स्थापित करें। भगवती के उग्र स्वरूप का ध्यान कर शंख स्थापना करें ('ॐ शंखायै नमः')। दोनों हाथों से शंख पकड़कर आवाहन मंत्र पढ़ें। विनियोग के पश्चात् यंत्र को जल से धोकर 16 कुमकुम की बिंदियां लगाएं और लघु प्राण प्रतिष्ठा करें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर चन्दन-धूप से पूजा करें। पूजा के तुरंत बाद दोनों हाथों से दीपक को बुझा दें। नित्य काले हकीक या रुद्राक्ष की माला से 11 माला जप करें। गुरु दीक्षा अत्यंत अनिवार्य है 7।

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