अक्षोभ्य भैरव (तारा के भैरव) उग्र मंत्र
ॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा
तारा तंत्र की पूर्णता, उग्र ऊर्जा का नियंत्रण व ब्रह्मांडीय संतुलन स्थापित करना 21।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तारा तंत्र की पूर्णता, उग्र ऊर्जा का नियंत्रण व ब्रह्मांडीय संतुलन स्थापित करना 21।
इस मंत्र से क्या होगा?
तारा तंत्र की पूर्णता, उग्र ऊर्जा का नियंत्रण व ब्रह्मांडीय संतुलन स्थापित करना
जाप विधि
तारा साधना के अंतर्गत दक्षिण दिशा में लाल आसन पर बैठकर जप किया जाता है 21।
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kaamya mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्रीं नमो भगवति मम समृद्धौ ज्वल ज्वल मां सर्व सम्पदं देहि देहि मम अलक्ष्मीं नाशय नाशय फट् स्वाहा।
navgrah mantraॐ विप्रराजाय विद्महे निशानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
bhakti mantraस्वामीये शरणं अय्यप्पा