श्री राधा (राधा-कृष्ण युगल) बीज बीज मंत्र
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यह 'राधा-कृष्ण प्रेम' का बीज है, जो सीधे गोलोक वृंदावन की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है और असीम आनंद की अनुभूति कराता है 59। नवग्रह (सौरमंडल के नियंत्रक देव) वैदिक ज्योतिष और 'ग्रह यामल' (Graha Yamala) तां
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह 'राधा-कृष्ण प्रेम' का बीज है, जो सीधे गोलोक वृंदावन की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है और असीम आनंद की अनुभूति कराता है 59। नवग्रह (सौरमंडल के नियंत्रक देव) वैदिक ज्योतिष और 'ग्रह यामल' (Graha Yamala) तांत्रिक ग्रंथ के अनुसार, मानव जीवन नवग्रहों की सूक्ष्म आवृत्तियों (Frequencies) और ऊर्जाओं से सीधे नियंत्रित होता है 60। महर्षि पराशर द्वारा अनुशंसित ग्रहों के विशेष एकाक्षरी बीज मंत्रों का एक निश्चित समयावधि में विशिष्ट संख्या में जप करने से ग्रहों की दशाओं (Dashas) के मारक प्रभाव बेअसर हो जाते हैं 60।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह 'राधा-कृष्ण प्रेम' का बीज है, जो सीधे गोलोक वृंदावन की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है और असीम आनंद की अनुभूति कराता है 59
नवग्रह (सौरमंडल के नियंत्रक देव) वैदिक ज्योतिष और 'ग्रह यामल' (Graha Yamala) तांत्रिक ग्रंथ के अनुसार, मानव जीवन नवग्रहों की सूक्ष्म आवृत्तियों (Frequencies) और ऊर्जाओं से सीधे नियंत्रित होता है 60
महर्षि पराशर द्वारा अनुशंसित ग्रहों के विशेष एकाक्षरी बीज मंत्रों का एक निश्चित समयावधि में विशिष्ट संख्या में जप करने से ग्रहों की दशाओं (Dashas) के मारक प्रभाव बेअसर हो जाते हैं
जाप विधि
हृदय में युगल स्वरूप का ध्यान करते हुए 108 बार जप 59। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र के बीज मंत्रों का जप प्रातः काल किया जाता है। शनि, राहु और केतु के मंत्रों का जप शाम या रात्रिकाल में किया जाता है 63। ग्रह का नाम अनुशंसित जप संख्या (40 दिनों में) जप का उत्तम समय / दिन सूर्य 7,000 प्रातः काल / रविवार चंद्र 11,000 प्रातः काल / सोमवार मंगल 10,000 प्रातः काल / मंगलवार बुध 9,000 प्रातः काल / बुधवार गुरु 19,000 प्रातः काल / गुरुवार शुक्र 16,000 प्रातः काल / शुक्रवार शनि 23,000 रात्रिकाल / शनिवार राहु 18,000 रात्रिकाल केतु 17,000 रात्रिकाल 60
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