सूर्य देव बीज बीज मंत्र
ह्रौं
सूर्य के हानिकारक प्रभावों को जड़ से मिटाना, इच्छाशक्ति का सुदृढ़ीकरण और आत्मा का पूर्ण संतुलन 61।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सूर्य के हानिकारक प्रभावों को जड़ से मिटाना, इच्छाशक्ति का सुदृढ़ीकरण और आत्मा का पूर्ण संतुलन 61।
इस मंत्र से क्या होगा?
सूर्य के हानिकारक प्रभावों को जड़ से मिटाना, इच्छाशक्ति का सुदृढ़ीकरण और आत्मा का पूर्ण संतुलन
जाप विधि
प्रातः काल पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें 60।
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ॐ ऐं क्लीं सौः
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
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dhyan mantraविशोका वा ज्योतिष्मती
stotra mantraपूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः । अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥ 12
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