मातृका देवी / वर्णेश्वरी (विशुद्ध चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
अं, आं, इं, ईं, उं, ऊं, ऋं, ॠं, लृं, ॡं, एं, ऐं, ओं, औं, अं, अः
यह मंत्रों का परम बीज समूह है। यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यह मंत्रों का परम बीज समूह है। यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्रों का परम बीज समूह है
यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है
जाप विधि
कंठ चक्र की सोलह पंखुड़ियों (सभी स्वरों) पर ध्यान करते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
vaidik mantraॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥
gyan mantraप्रज्ञानम् ब्रह्म
navgrah mantraॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा