मातृका देवी / वर्णेश्वरी (विशुद्ध चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
अं, आं, इं, ईं, उं, ऊं, ऋं, ॠं, लृं, ॡं, एं, ऐं, ओं, औं, अं, अः
यह मंत्रों का परम बीज समूह है। यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह मंत्रों का परम बीज समूह है। यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्रों का परम बीज समूह है
यह संचार कौशल की सर्वोच्च शुद्धि और वाक् सिद्धि (Power of speech) प्रदान करता है
जाप विधि
कंठ चक्र की सोलह पंखुड़ियों (सभी स्वरों) पर ध्यान करते हुए जप 2।
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विशोका वा ज्योतिष्मती
vaidik mantraॐ ये ते पाशा वरुण सप्तसप्त त्रेधा तिष्ठन्ति विषिता रुशन्तः । छिनन्तु सर्वे अनृतं वदन्तं यः सत्यवाद्यति तं सृजन्तु ॥
stotra mantraन विद्यते यस्य न जन्म कर्म वा न नाम रूपे गुणदोष एव वा । तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ 4
navgrah mantraॐ शीतप्रभाय विद्महे षोडशकलाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
bhakti mantraॐ श्री कालिकायै नमः
shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥