भगवान परशुराम बीज बीज मंत्र
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नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का सर्वनाश, ब्रह्मांडीय सुरक्षा प्राप्त करना, सर्वोत्तम ज्ञान की प्राप्ति, और करियर तथा जीवन में उच्चतम स्तर की सफलता (High levels in career) हासिल करना 30। माँ दुर्गा, क
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का सर्वनाश, ब्रह्मांडीय सुरक्षा प्राप्त करना, सर्वोत्तम ज्ञान की प्राप्ति, और करियर तथा जीवन में उच्चतम स्तर की सफलता (High levels in career) हासिल करना 30। माँ दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, त्रिपुरसुंदरी, तारा (एवं दशमहाविद्या) शाक्त तंत्र, तोडल तंत्र और श्री विद्या परंपरा में आद्या शक्ति (Divine Mother) के विभिन्न स्वरूपों के बीज मंत्रों को 'शक्ति बीज' कहा जाता है 5। दशमहाविद्याओं के ये अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र ब्रह्मांड की रचनात्मक, पालनकर्ता और संहारक ऊर्जाओं का सीधा संचालन करते हैं 33। इन बीजों के माध्यम से साधक भौतिक प्रचुरता (धन, सौंदर्य) से लेकर सर्वोच्च आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) तक सब कुछ प्राप्त कर सकता है 34।
इस मंत्र से क्या होगा?
नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं का सर्वनाश, ब्रह्मांडीय सुरक्षा प्राप्त करना, सर्वोत्तम ज्ञान की प्राप्ति, और करियर तथा जीवन में उच्चतम स्तर की सफलता (High levels in career) हासिल करना 30
माँ दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, त्रिपुरसुंदरी, तारा (एवं दशमहाविद्या) शाक्त तंत्र, तोडल तंत्र और श्री विद्या परंपरा में आद्या शक्ति (Divine Mother) के विभिन्न स्वरूपों के बीज मंत्रों को 'शक्ति बीज' कहा जाता है 5
दशमहाविद्याओं के ये अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र ब्रह्मांड की रचनात्मक, पालनकर्ता और संहारक ऊर्जाओं का सीधा संचालन करते हैं 33
इन बीजों के माध्यम से साधक भौतिक प्रचुरता (धन, सौंदर्य) से लेकर सर्वोच्च आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) तक सब कुछ प्राप्त कर सकता है
जाप विधि
प्रातः काल सूर्योदय के समय पूर्ण श्रद्धा के साथ 108 बार जाप करें 30।
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ॐ नमो भगवति सरस्वती परमेश्वरी वाग्वादिनी मं विद्यां देहि भगवति हंसवाहिनी हंससमारूढा बुद्धिं देहि देहि प्रज्ञां देहि देहि विद्या परमेश्वरी सरस्वती स्वाहा ॥
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jap mantraॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
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siddh mantraॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥
ugra mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा