भगवान गणेश बीज बीज मंत्र
गं
इस बीज में 'ग' गणपति का और बिंदु दुखों के उन्मूलन का प्रतीक है। यह सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं का विनाश करता है, नई शुरुआत सुनिश्चित करता है, और असीम सफलता व सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति कराता है 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
इस बीज में 'ग' गणपति का और बिंदु दुखों के उन्मूलन का प्रतीक है। यह सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं का विनाश करता है, नई शुरुआत सुनिश्चित करता है, और असीम सफलता व सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति कराता है 13।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस बीज में 'ग' गणपति का और बिंदु दुखों के उन्मूलन का प्रतीक है
यह सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं का विनाश करता है, नई शुरुआत सुनिश्चित करता है, और असीम सफलता व सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति कराता है
जाप विधि
सुबह 4 बजे से, भोजन ग्रहण करने से पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके 108 बार जप करें 13।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।
gyan mantraॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
mool mantraॐ ह्रीं ह्रीं साफल्यायै सिद्धये ॐ नमः
jap mantraॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
dhyan mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥