भगवान सुदर्शन जप मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश। 42
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश। 42
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश
जाप विधि
विशेष संकट के समय रुद्राक्ष या तुलसी की माला से १०८ बार जप। 42
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कालीं कूर्चं परं नाम दक्षिणे दक्षिणे कालिके तता । वशिष्ठ मन्त्रं प्रोच्च्यार्थ मोचय दयमीश्वरि कालीं कूर्चं परे निरमेशास्याश्चापहारिणी ॥ कालीं भीमं ठटं भद्रकाली भीमं शिवस्यहि शापं मोचय युग्मापो विध्येयं चापहारिणी ॥
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे श्मशान कालिकायै सर्व बाधा निवारणाय सर्व शत्रु संहारणाय मम रक्षां कुरु कुरु स्वाहा
stotra mantraकाज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि बिचारो । कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो ॥ बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40
vaidik mantraॐ सङ्गच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ॥
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraज्ञानदा