भगवान सुदर्शन जप मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश। 42
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश। 42
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश
जाप विधि
विशेष संकट के समय रुद्राक्ष या तुलसी की माला से १०८ बार जप। 42
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