नवदुर्गा / चण्डी (नवार्ण) जप मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
अपार शक्ति की प्राप्ति, सर्व प्रकार के संकटों का नाश, और भौतिक इच्छाओं के साथ मोक्ष की सिद्धि। 45
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अपार शक्ति की प्राप्ति, सर्व प्रकार के संकटों का नाश, और भौतिक इच्छाओं के साथ मोक्ष की सिद्धि। 45
इस मंत्र से क्या होगा?
अपार शक्ति की प्राप्ति, सर्व प्रकार के संकटों का नाश, और भौतिक इच्छाओं के साथ मोक्ष की सिद्धि
जाप विधि
१०८ बार, रुद्राक्ष या रक्त चंदन की माला, नवरात्रि या नित्य प्रति साधना। 29
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ॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12
dhyan mantraअतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
beej mantraक्लीं
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
kaamya mantraया श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
gyan mantraअहं ब्रह्मास्मि