काल भैरव जप मंत्र
ॐ कालभैरवाय नमः
समय के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण, अनिश्चितता एवं भय से पूर्ण मुक्ति, तथा बुरी शक्तियों से रक्षण। 68
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समय के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण, अनिश्चितता एवं भय से पूर्ण मुक्ति, तथा बुरी शक्तियों से रक्षण। 68
इस मंत्र से क्या होगा?
समय के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण, अनिश्चितता एवं भय से पूर्ण मुक्ति, तथा बुरी शक्तियों से रक्षण
जाप विधि
१०८ बार, रुद्राक्ष या काले हकीक की माला, रात्रिकाल या कालाष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में। 67
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ॐ वायुदेवाय नमः
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
ugra mantraॐ भम भैरवाय नमस्तुभ्यम कपाले कृपणाय चंड मुंड विनाशाय वीरभद्र स्वरूपण सर्वत्र प्रभ देव रक्षक सुरा त्रोक्य विजय संभो नमस्ते काल रूपण ओम छम काल भैरवाय क्रूर रूपाय विकिरण मूर्धने श्री नेत्राय खग धणे दुर्जया भय हराय सर्व शत्रु संारकाय स्वाहा
siddh mantraत्वमस्मिन् कार्य निर्योगे प्रमाणं हरि सत्तम । हनुमान यत्नमास्थाय दुःख क्षय करो भव ॥
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navgrah mantraॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।