बृहस्पति देव (गुरु) जप मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
पितृदोष की शांति, उच्च शिक्षा व पांडित्य की प्राप्ति, और आध्यात्मिक साधना में उन्नति। 23
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पितृदोष की शांति, उच्च शिक्षा व पांडित्य की प्राप्ति, और आध्यात्मिक साधना में उन्नति। 23
इस मंत्र से क्या होगा?
पितृदोष की शांति, उच्च शिक्षा व पांडित्य की प्राप्ति, और आध्यात्मिक साधना में उन्नति
जाप विधि
१९००० जप संख्या (४० दिन में), हल्दी की माला, गुरुवार के दिन पीत आसन पर। 24
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ॐ सूर्याय नमः
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
ugra mantra॥ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ॥
naam mantraघुश्मेश्वर
navgrah mantraदधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुट भूषणम्॥
tantrik mantraॐ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ठ: स्वाहा