बुध देव जप मंत्र
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण। 24
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण। 24
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण
जाप विधि
९००० जप संख्या (४० दिन में), रुद्राक्ष या पन्ना की माला, बुधवार। (वैकल्पिक: ॐ बुं बुधाय नमः) 24
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ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
ugra mantraॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
gyan mantraसदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
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