बुध देव जप मंत्र
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण। 24
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण। 24
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण
जाप विधि
९००० जप संख्या (४० दिन में), रुद्राक्ष या पन्ना की माला, बुधवार। (वैकल्पिक: ॐ बुं बुधाय नमः) 24
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इदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
vaidik mantraॐ सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥
mool mantraॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
navgrah mantraॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
bhakti mantraजय सीता राम जय जय हनुमान