ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
दत्तात्रेय मूल

दत्तात्रेय मूल सिद्ध मंत्र

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों की नकारात्मक और अस्थिर ऊर्जा का शमन 76। भगवान दत्तात्रेय के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) की एकीकृत कृपा और आध्यात्मिक चेतना का जागरण 76।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों की नकारात्मक और अस्थिर ऊर्जा का शमन 76। भगवान दत्तात्रेय के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) की एकीकृत कृपा और आध्यात्मिक चेतना का जागरण 76।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों की नकारात्मक और अस्थिर ऊर्जा का शमन 76

02

भगवान दत्तात्रेय के माध्यम से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) की एकीकृत कृपा और आध्यात्मिक चेतना का जागरण

जाप विधि

गुरु पूर्णिमा या चंद्र ग्रहण के विशेष मुहूर्त पर १०८ की संख्या में स्फटिक या रुद्राक्ष माला से जप 76। 'द्रां' बीज पर विशेष ध्यान दें 76।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा

sabar mantra

क्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18

kavach mantra

पातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15

naam mantra

जानकीनाथ

navgrah mantra

धरणीगर्भ सम्भूतं विद्युत्कांति समप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्॥

jap mantra

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः