ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
कमला महाविद्या (सांम्राज्यदायिनी)

कमला महाविद्या (सांम्राज्यदायिनी) सिद्ध मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्सौः जगत्प्रसूत्यै नमः ॥

तंत्र में इसे 'साम्राज्यदायिनी विद्या' कहा जाता है 47। यह दरिद्रता का समूल नाश कर साधक को अखंड धन, संपत्ति, वैभव, भाग्य और पूर्ण सफलता प्रदान करती है 47। भौतिक सुखों के साथ-साथ यह मोक्ष प्राप्ति का भी

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

तंत्र में इसे 'साम्राज्यदायिनी विद्या' कहा जाता है 47। यह दरिद्रता का समूल नाश कर साधक को अखंड धन, संपत्ति, वैभव, भाग्य और पूर्ण सफलता प्रदान करती है 47। भौतिक सुखों के साथ-साथ यह मोक्ष प्राप्ति का भी अचूक मार्ग है 47।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

तंत्र में इसे 'साम्राज्यदायिनी विद्या' कहा जाता है 47

02

यह दरिद्रता का समूल नाश कर साधक को अखंड धन, संपत्ति, वैभव, भाग्य और पूर्ण सफलता प्रदान करती है 47

03

भौतिक सुखों के साथ-साथ यह मोक्ष प्राप्ति का भी अचूक मार्ग है

जाप विधि

बुधवार से उत्तर दिशा की ओर मुख कर प्रारंभ करें 46। स्टील की प्लेट में सिंदूर से कमला यंत्र बनाएं 46। यंत्र पर चावल, मिठाई और पुष्प अर्पित करें 46। दिव्य कृपा प्राप्ति हेतु प्रतिदिन २१ माला जप करें 46। दीक्षा ग्रहण करने हेतु पूर्णिमा, धन त्रयोदशी या दिवाली का मुहूर्त श्रेष्ठ है 47।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

gyan mantra

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

jap mantra

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

mool mantra

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

kaamya mantra

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

kavach mantra

ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34

sabar mantra

ओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26