दत्तात्रेय (तांत्रिक मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की सम्मिलित कृपा की एक साथ प्राप्ति, गुरु दोष का निवारण, पितृ दोष की शांति एवं पारिवारिक उन्नति 63।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की सम्मिलित कृपा की एक साथ प्राप्ति, गुरु दोष का निवारण, पितृ दोष की शांति एवं पारिवारिक उन्नति 63।
इस मंत्र से क्या होगा?
त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की सम्मिलित कृपा की एक साथ प्राप्ति, गुरु दोष का निवारण, पितृ दोष की शांति एवं पारिवारिक उन्नति
जाप विधि
गुरुवार के दिन स्नानादि के पश्चात् पीले आसन पर बैठकर, उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष की माला से १०८ बार जप करें। इसमें 'द्रां' बीज विशेष फलदायी है 63।
विशेष टिप्पणियाँ
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kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
bhakti mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
beej mantraद्रीं
dhyan mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24