देवता का मूल रूप मंत्र
78 मंत्रॐ श्री हनुमते नमः
मानसिक और शारीरिक दुर्बलता का नाश, अदम्य साहस एवं बल की प्राप्ति, तथा दुर्घटनाओं व संकटों से सुरक्षा 1।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः
जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम…
ॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
मन की गुह्य एवं अभीष्ट कामनाओं की तीव्रतम सिद्धि, कार्य सफलता एवं बौद्धिक क्षमता (ऐं बीज के प्रभाव से) का विकास 7।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ चंद्राय नमः)
मानसिक अवसाद (Depression) का नाश, भावनाओं पर नियंत्रण, कुण्डली के चंद्र दोष का निवारण तथा जीवन में अपार सुख-समृद्धि व शांति की प्राप्ति 47।
ॐ वराहाय नमः
भूमि, संपत्ति एवं रियल एस्टेट विवादों में निश्चित विजय, अज्ञात भयों का शमन तथा घोर संकट एवं ऋणात्मक शक्तियों से स्थूल रक्षा 16।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
अकाल मृत्यु से रक्षा, काले जादू, भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों को भस्म करना, गंभीर मानसिक चिंताओं व रोगों से मुक्ति, शत्रुओं का स्तंभन एवं परम शांति व आध्यात…
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगतपते देही मे तनय कृष्ण त्वामह शरणं गतः
सुयोग्य एवं स्वस्थ संतान की प्राप्ति, बार-बार हो रहे गर्भपात या संतान संबंधी बाधाओं का निवारण एवं पारिवारिक पूर्णता 28।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
स्मरण शक्ति का तीव्र विकास, विद्या, कला व संगीत के क्षेत्र में सर्वोच्च सफलता, अज्ञानता का नाश एवं उच्च कोटि की बुद्धि व प्रज्ञा की प्राप्ति 38।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य 47।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय
भगवान भैरव की प्रत्यक्ष कृपा व सिद्धि प्राप्त करना, जीवन के सभी संकटों से त्वरित मुक्ति एवं तंत्र बाधाओं का निराकरण 8।
ॐ गं गणपतये नमः
कार्य में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाओं का निवारण, नवीन कार्यों का निर्विघ्न आरंभ, आध्यात्मिक प्रबुद्धता एवं सर्वत्र सफलता की प्राप्ति 1।
ॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्
अहंकार के शमन, घोर शत्रुओं के स्तम्भन, नकारात्मक शक्तियों के पूर्ण विनाश एवं दरिद्रता व अस्थिरता से बचाव करते हुए उत्तम स्वास्थ्य और न्याय की प्राप्ति 6।
ॐ शरवणभवाय नमः
जीवन के आंतरिक और बाहरी विघ्नों पर विजय, मंगल दोष व कुजा दोष का निवारण एवं असीम ऊर्जा व नेतृत्व क्षमता की प्राप्ति 44।
ॐ श्री रामाय नमः
उत्कृष्ट चरित्र निर्माण, सर्वकार्य सिद्धि, अज्ञात भय का नाश एवं भगवान श्री राम की अहैतुकी कृपा व सुरक्षा की प्राप्ति 1।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
ॐ मत्स्याय नमः
भवन के सभी प्रकार के वास्तु दोषों का शमन (जिस प्रकार मछली तालाब को स्वच्छ करती है), व्यवसाय में अभूतपूर्व वृद्धि, संकटों एवं प्रलयंकारी परिस्थितियों के समय बचाव…
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा
भगवान के प्रति सर्वस्व एवं निःस्वार्थ समर्पण (स्वाहा के प्रभाव से), सांसारिक एवं आध्यात्मिक सुख-समृद्धि, एवं गोलोक वृंदावन की दिव्य प्रेमामृत (माधुर्य भाव) भक्त…
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (सामान्य मूल: ॐ सूर्याय नमः)
कुण्डली में सूर्य के अशुभ प्रभावों की शांति, स्वास्थ्य, तेज, यश, सामाजिक व प्रशासनिक प्रतिष्ठा, तथा नेत्र व हृदय रोगों का निवारण 47।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
सांसारिक बंधनों एवं मोह माया से मुक्ति, भौतिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति, चरित्र की दृढ़ता एवं जीवन की सभी समस्याओं से छुटकारा 1।
ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
समस्त प्रकार की सांसारिक व आध्यात्मिक बाधाओं का नाश, शक्ति और साहस की असीम प्राप्ति, नवग्रहों की शांति तथा शत्रुओं एवं नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण दमन 34।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः
व्यापार व नौकरी में भारी सफलता, कठोर ऋण से मुक्ति, और पीढ़ियों तक निरंतर धन-धान्य की समृद्धि बनाए रखना 1।
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (सामान्य मूल: ॐ राहवे नमः)
मानसिक भ्रम का नाश, राहु महादशा के दुष्प्रभावों की शांति, आकस्मिक धन लाभ, राजनीतिक सफलता एवं अतीन्द्रिय क्षमता (Charisma) का विकास 47।
ॐ वामनाय नमः
समाज में खोया हुआ अधिकार पुनः प्राप्त करना, मिथ्या अहंकार का नाश एवं जीवन में विशुद्ध ज्ञान तथा विनम्रता की वृद्धि 16।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं राम् श्रीं ॐ राधायै स्वाहा ॐ
शारीरिक आकर्षण एवं रूप-सौंदर्य में वृद्धि, प्रेम संबंधों व दांपत्य जीवन में मधुरता, तथा भगवान कृष्ण के दिव्य माधुर्य प्रेम की प्राप्ति 40।
ॐ नमो नारायणाय
इस मंत्र के जप से चित्त की चंचलता समाप्त होकर गहन शांति प्राप्त होती है, मन में प्राणिमात्र के प्रति दया भाव जाग्रत होता है, पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं और अंत…
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा
जटिल से जटिल संकटों का समाधान, विघ्नों का समूल नाश तथा समाज में मान-सम्मान व प्रभाव में अत्यधिक वृद्धि 1।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा
दरिद्रता का समूल नाश, अपार धन-संपत्ति, स्वर्ण एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति, तथा गंभीर आर्थिक बाधाओं व ऋण का शमन 8।
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः
व्यवसाय व गृहस्थ जीवन में शुभता तथा लाभ की वृद्धि, अपार सौभाग्य, एवं सर्वजन अनुकूलन (वशीकरण) की प्राप्ति 1।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रीमे ह्रौं क्षं क्षेत्रपालाय काल भैरवाय नमः
तंत्र-मंत्र व काले जादू की बाधाओं का नाश, अवांछित दुष्ट शक्तियों से क्षेत्र व देह की रक्षा एवं समय (काल) के दुष्प्रभाव से पूर्ण मुक्ति 9।
ॐ नमो हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्
घोर शत्रुओं का शमन, असाध्य रोगों का निवारण, तंत्र-बाधा का विनाश एवं भूत-प्रेत आदि के भय से पूर्ण मुक्ति 43।
श्री राम जय राम जय जय राम
मानसिक शांति, जन्म-मृत्यु के चक्र से मोक्ष की प्राप्ति, जीवन के सभी प्रकार के दुखों का अंत एवं हृदय में परम भक्ति की जागृति 1।
ॐ सौं शरवणभवाय श्रीं ह्रीं क्लीं क्लौं सौं नमः
सभी प्रकार के भयों का शमन, शत्रुओं पर अजेय विजय, आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) एवं कालसर्प दोष से राहत 45।
ॐ कूर्माय नमः
जीवन में अचल स्थायित्व एवं संतुलन की प्राप्ति, भवन निर्माण से संबंधित कार्यों में सफलता एवं दीर्घायु की प्राप्ति 15।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः
श्री राम जय राम कोदण्ड राम
विकट विपत्तियों और शत्रुओं का शमन, अटूट साहस की प्राप्ति एवं न्यायालयीन मुकदमों में विजय 1।
ॐ रुद्राय रोगनाशाय अगच्छ च राम ॐ नमः
असाध्य और दीर्घकालिक शारीरिक एवं मानसिक रोगों का समूल नाश तथा उत्तम स्वास्थ्य व प्राणशक्ति की प्राप्ति 7।
ॐ नमो भगवते रूद्राय
यह मूल मंत्र मुख्य रूप से मन को शीतलता और स्थिरता प्रदान करने, उग्र असाध्य रोगों के शमन, मानसिक तनाव से मुक्ति तथा जीवन में उत्पन्न होने वाली जटिल बाधाओं को दूर…
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वमंगल की स्थापना, पारिवारिक सामंजस्य, सकारात्मक ऊर्जा का अटूट प्रवाह एवं लौकिक समृद्धि की प्राप्ति 7।
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
ॐ नृं नृं नृं नरसिंहाय नमः
साधक के भीतर आंतरिक शक्ति एवं अदम्य साहस की प्राप्ति, समस्त प्रकार के भय का पूर्ण नाश तथा भगवान नृसिंह की प्रत्यक्ष एवं त्वरित सुरक्षा प्राप्त करना 18।
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
ॐ बुद्धाय नमः
परम वैराग्य, मानसिक एकाग्रता, अज्ञानता का नाश, भावनात्मक आघातों से मुक्ति एवं आध्यात्मिक ज्ञान (ज्ञानोदय) की प्राप्ति 16।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (सामान्य मूल: ॐ भौमाय नमः)
मांगलिक दोष की शांति, दुर्घटनाओं से बचाव, ऋण से मुक्ति, साहस एवं पराक्रम में वृद्धि तथा संपत्ति विवादों का समाधान 47।
ॐ राम राम ॐ राम राम परशु हस्ताय नमः
शत्रुओं पर पूर्ण विजय, अदम्य साहस एवं पराक्रम की प्राप्ति, भौतिक संपदा की वृद्धि, वाणी के दोषों का शमन एवं बौद्धिक क्षमता का तीव्र विकास 21।
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः (सामान्य मूल: ॐ बुधाय नमः)
स्नायु (Nervous System) रोगों से रक्षा, बौद्धिक विकास, व्यापार में सफलता एवं वाणी (Communication) में मधुरता तथा प्रभावशीलता 47।
ॐ कल्किने नमः
कलियुग के दोषों एवं पापों का शमन, धर्म की स्थापना, भविष्य के अज्ञात संकटों से सुरक्षा एवं आध्यात्मिक तथा भौतिक उन्नति 32।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (सामान्य मूल: ॐ गुरवे नमः)
बृहस्पति के अशुभ प्रभावों का शमन, उच्च शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, यश तथा असीम सौभाग्य व आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति 47।
ॐ भ्रं भैरवाय नमः
साधक में असीम शक्ति का संचार, अकाल मृत्यु के भय का शमन एवं घोर शत्रुओं व बाधाओं पर पूर्ण विजय 8।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा
अकाल मृत्यु व प्रबल शत्रुओं का शमन, काले जादू एवं तंत्र-बाधा का विनाश, असीम निर्भयता, अज्ञान का नाश एवं परम शक्ति की प्राप्ति 35।
ॐ नमः शिवाय
इस मंत्र का निरंतर जप चेतना को ऊर्ध्वगामी बनाता है तथा मूलाधार चक्र को दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में सक्रिय करता है, जिससे आध्यात्मिक उत्थान होता है 3। इसके…
ॐ गं ग्लौं श्रौं ग्लौं गं ॐ नमः
आत्मिक शांति, परम ज्ञान की प्राप्ति, चेतना का विस्तार तथा शिव सायुज्य की प्रत्यक्ष अनुभूति 7।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय
जीवन में अचानक आने वाली विपत्तियों का त्वरित नाश, घोर संकटों से मुक्ति, कलह का शमन एवं साधक की अकाल मृत्यु से पूर्ण रक्षा 8।
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्
तेज और ओज में असीमित वृद्धि, गुप्त एवं प्रत्यक्ष शत्रुओं का कठोर दमन तथा समाज में वर्चस्व की स्थापना 7।
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
घर में स्थायी सुख-शांति का वास, अपार धन की प्राप्ति, दरिद्रता का नाश एवं सभी प्रकार के भौतिक ऐश्वर्य की सिद्धि 1।