भगवान नृसिंह (अनुष्टुभ् महामंत्र) मूल मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
अकाल मृत्यु से रक्षा, काले जादू, भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों को भस्म करना, गंभीर मानसिक चिंताओं व रोगों से मुक्ति, शत्रुओं का स्तंभन एवं परम शांति व आध्यात्मिक उत्थान 19।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अकाल मृत्यु से रक्षा, काले जादू, भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों को भस्म करना, गंभीर मानसिक चिंताओं व रोगों से मुक्ति, शत्रुओं का स्तंभन एवं परम शांति व आध्यात्मिक उत्थान 19।
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु से रक्षा, काले जादू, भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों को भस्म करना, गंभीर मानसिक चिंताओं व रोगों से मुक्ति, शत्रुओं का स्तंभन एवं परम शांति व आध्यात्मिक उत्थान
जाप विधि
संध्या काल या गोधूलि बेला में भगवान नृसिंह के चित्र या यंत्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर २१, ५१ या १०८ बार जप करें। संकट काल में इसे मानसिक रूप से अनवरत जपा जा सकता है 19।
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क्ष्रौं
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
navgrah mantraधरणीगर्भ सम्भूतं विद्युत्कांति समप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्॥
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dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥