ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माता महालक्ष्मी (श्री लक्ष्मी कवच)

माता महालक्ष्मी (श्री लक्ष्मी कवच) कवच मंत्र

नासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31

धन-धान्य, संपत्ति और सर्वैश्वर्य की असीमित व स्थिर प्राप्ति, रोग एवं व्याधि का नाश, भयंकर विपत्तियों (राजद्वार, जल, रणभूमि) में रक्षा, और घर में महालक्ष्मी का चिरकाल तक स्थिर निवास 31।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकवच मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

धन-धान्य, संपत्ति और सर्वैश्वर्य की असीमित व स्थिर प्राप्ति, रोग एवं व्याधि का नाश, भयंकर विपत्तियों (राजद्वार, जल, रणभूमि) में रक्षा, और घर में महालक्ष्मी का चिरकाल तक स्थिर निवास 31।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

धन-धान्य, संपत्ति और सर्वैश्वर्य की असीमित व स्थिर प्राप्ति, रोग एवं व्याधि का नाश, भयंकर विपत्तियों (राजद्वार, जल, रणभूमि) में रक्षा, और घर में महालक्ष्मी का चिरकाल तक स्थिर निवास

जाप विधि

गुरु और इष्ट देवता का ध्यान करते हुए, इस कवच को भोजपत्र अथवा ताड़पत्र पर लिखकर दाहिनी भुजा या गले में धारण करें और नित्य शुद्ध भाव से इसका पाठ करें 31।

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