वरुण / पाशविमोचन सूक्त (अथर्ववेद) वैदिक मंत्र
ॐ ये ते पाशा वरुण सप्तसप्त त्रेधा तिष्ठन्ति विषिता रुशन्तः । छिनन्तु सर्वे अनृतं वदन्तं यः सत्यवाद्यति तं सृजन्तु ॥
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान।
इस मंत्र से क्या होगा?
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान
जाप विधि
गंभीर संकट, अकारण कारावास का भय या अत्यधिक मानसिक तनाव के समय कुशा के आसन पर बैठकर जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय धन धान्य वृद्धिकराय शीघ्रं वश्यं कुरु कुरु स्वाहा
navgrah mantraॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
naam mantraहर हर महादेव
shanti mantraॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
bhakti mantraजय सीता राम जय जय हनुमान