वरुण / पाशविमोचन सूक्त (अथर्ववेद) वैदिक मंत्र
ॐ ये ते पाशा वरुण सप्तसप्त त्रेधा तिष्ठन्ति विषिता रुशन्तः । छिनन्तु सर्वे अनृतं वदन्तं यः सत्यवाद्यति तं सृजन्तु ॥
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान।
इस मंत्र से क्या होगा?
पापों के बन्धन (पाश) से मुक्ति, मानसिक ग्लानि से बचाव, शत्रुओं की साजिश का नाश एवं वरुण देव से अभय दान
जाप विधि
गंभीर संकट, अकारण कारावास का भय या अत्यधिक मानसिक तनाव के समय कुशा के आसन पर बैठकर जप।
विशेष टिप्पणियाँ
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एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि । जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥ 4
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naam mantraअंगारक
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bhakti mantraश्री कृष्णः शरणं मम
tantrik mantraॐ स्वर्णाकर्षण भैरवं देवं सर्व शक्ति समन्वितम् सर्व अभीष्ट फलं देहि श्री क्षेत्रपाल नमोस्तुते