ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.३)

भाववृत्त / अघमर्षण सूक्त (१०.१९०.३) वैदिक मंत्र

ॐ सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथा पूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं च अन्तरिक्षमथो स्वः ॥

सृष्टि की शाश्वत व्यवस्था का स्मरण, मानसिक स्थिरता एवं पाप-प्रवृत्तियों का पूर्ण विसर्जन।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सृष्टि की शाश्वत व्यवस्था का स्मरण, मानसिक स्थिरता एवं पाप-प्रवृत्तियों का पूर्ण विसर्जन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सृष्टि की शाश्वत व्यवस्था का स्मरण, मानसिक स्थिरता एवं पाप-प्रवृत्तियों का पूर्ण विसर्जन

जाप विधि

बाईं नासिका से श्वास छोड़ते (रेचक) हुए मानसिक जप। जल मार्जन के साथ भी इसका सस्वर उपयोग।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

shanti mantra

ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

kaamya mantra

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।

beej mantra

कें

stotra mantra

दिदृक्षवो यस्य पदं सुमंगलम विमुक्त संगा मुनयः सुसाधवः । चरन्त्यलोकव्रतमव्रणं वने भूतात्मभूता सुहृदः स मे गतिः ॥ 4

navgrah mantra

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:।।

mool mantra

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः