सोम / पवमान सूक्त (सामवेद परम्परा) वैदिक मंत्र
ॐ यन्मे गर्भे वसतः पापमुग्रं यज्जायमानस्य च किंचिदन्यत् । तत्पवमानः पवित्रेण पुनातु ॥
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।
इस मंत्र से क्या होगा?
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना
जाप विधि
प्रायश्चित्त अनुष्ठानों में कुशासन पर बैठकर यज्ञ-भस्म या पवित्र जल धारण करते हुए उपांशु गान।
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