ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सोम / पवमान सूक्त (सामवेद परम्परा)

सोम / पवमान सूक्त (सामवेद परम्परा) वैदिक मंत्र

ॐ यन्मे गर्भे वसतः पापमुग्रं यज्जायमानस्य च किंचिदन्यत् । तत्पवमानः पवित्रेण पुनातु ॥

जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना

जाप विधि

प्रायश्चित्त अनुष्ठानों में कुशासन पर बैठकर यज्ञ-भस्म या पवित्र जल धारण करते हुए उपांशु गान।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

navgrah mantra

ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।

beej mantra

द्रीं

dhyan mantra

विशोका वा ज्योतिष्मती

mool mantra

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)

stotra mantra

न मां त्यजेथाः श्रितकल्पवल्लि सद्भक्ति-चिन्तामणि-कामधेनो । न मां त्यजेथा भव सुप्रसन्ने गृहे कलत्रेषु च पुत्रवर्गे ॥ 27

shanti mantra

ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥