सोम / पवमान सूक्त (सामवेद परम्परा) वैदिक मंत्र
ॐ यन्मे गर्भे वसतः पापमुग्रं यज्जायमानस्य च किंचिदन्यत् । तत्पवमानः पवित्रेण पुनातु ॥
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना।
इस मंत्र से क्या होगा?
जन्म-जन्मान्तर और गर्भ-काल से संचित भयंकर पापों का मार्जन एवं आत्मा की मूल पवित्रता की पुनर्स्थापना
जाप विधि
प्रायश्चित्त अनुष्ठानों में कुशासन पर बैठकर यज्ञ-भस्म या पवित्र जल धारण करते हुए उपांशु गान।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
beej mantraद्रीं
dhyan mantraविशोका वा ज्योतिष्मती
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
stotra mantraन मां त्यजेथाः श्रितकल्पवल्लि सद्भक्ति-चिन्तामणि-कामधेनो । न मां त्यजेथा भव सुप्रसन्ने गृहे कलत्रेषु च पुत्रवर्गे ॥ 27
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥