मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.६) वैदिक मंत्र
ॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम
जाप विधि
रात्रि में शयन से पूर्व तथा प्रातः उठते ही सर्वप्रथम बिस्तर पर बैठकर इस मंत्र का ५ बार मानसिक जप।
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क्लीं
mool mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
kaamya mantraॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
bhakti mantraराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे
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stotra mantraबंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो । देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥ जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत सँहारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40