मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.६) वैदिक मंत्र
ॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण, काम-क्रोधादि विकारों से रक्षा, लक्ष्य के प्रति अचूक दृष्टि एवं मानसिक संयम
जाप विधि
रात्रि में शयन से पूर्व तथा प्रातः उठते ही सर्वप्रथम बिस्तर पर बैठकर इस मंत्र का ५ बार मानसिक जप।
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shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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beej mantraह्रौं
navgrah mantraजपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥