ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान महेश्वर (संसार पावन शिव कवच)

भगवान महेश्वर (संसार पावन शिव कवच) कवच मंत्र

शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन) 8।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारकवच मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन) 8।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन)

जाप विधि

प्रजापति ऋषि, गायत्री छन्द और महेश्वर देवता का स्मरण करते हुए एकाग्रचित्त होकर पांच लाख (पञ्चलक्ष) बार जप करने से यह कवच पूर्ण रूप से सिद्ध एवं फलदायी होता है 8।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

vaidik mantra

ॐ येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतममृतेन सर्वम् । येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

jap mantra

ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः

gyan mantra

ॐ नमो भगवति सरस्वती परमेश्वरी वाग्वादिनी मं विद्यां देहि भगवति हंसवाहिनी हंससमारूढा बुद्धिं देहि देहि प्रज्ञां देहि देहि विद्या परमेश्वरी सरस्वती स्वाहा ॥

stotra mantra

कुंचितै: कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयो:। हारकेयूरकं कंकणप्रोज्ज्वलं किंकिणीमंजुलं श्यामलं तं भजे।। 9

mool mantra

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (सामान्य मूल: ॐ शनैश्चराय नमः)

tantrik mantra

ॐ हूं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद सर्व जन हृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा