भगवान महेश्वर (संसार पावन शिव कवच) कवच मंत्र
शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन) 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन) 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्ण प्राप्ति, शरीर के समस्त अंगों की निरंतर सुरक्षा और संसार के समस्त पापों से मुक्ति (संसार पावन)
जाप विधि
प्रजापति ऋषि, गायत्री छन्द और महेश्वर देवता का स्मरण करते हुए एकाग्रचित्त होकर पांच लाख (पञ्चलक्ष) बार जप करने से यह कवच पूर्ण रूप से सिद्ध एवं फलदायी होता है 8।
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