भगवान श्री राम (राम कवच / रामरक्षा स्तोत्र) कवच मंत्र
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
पाताल, भूतल और व्योम में विचरण करने वाली छद्म व अदृश्य शक्तियों से संपूर्ण सुरक्षा, पापों का नाश, अमोघ आज्ञा शक्ति (अव्याहताज्ञः) व सर्व सिद्धियों की प्राप्ति और सर्वत्र जय-मंगल 34।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पाताल, भूतल और व्योम में विचरण करने वाली छद्म व अदृश्य शक्तियों से संपूर्ण सुरक्षा, पापों का नाश, अमोघ आज्ञा शक्ति (अव्याहताज्ञः) व सर्व सिद्धियों की प्राप्ति और सर्वत्र जय-मंगल 34।
इस मंत्र से क्या होगा?
पाताल, भूतल और व्योम में विचरण करने वाली छद्म व अदृश्य शक्तियों से संपूर्ण सुरक्षा, पापों का नाश, अमोघ आज्ञा शक्ति (अव्याहताज्ञः) व सर्व सिद्धियों की प्राप्ति और सर्वत्र जय-मंगल
जाप विधि
प्रातःकाल निद्रा से जागने के पश्चात भगवान श्री राम का ध्यान करते हुए नित्य इसका पाठ करें। इस कवच को सिद्ध करके कण्ठ में धारण करना चाहिए 34।
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ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॐ ॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः
jap mantraॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा
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sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
beej mantraप्रां