गुरु गोरखनाथ धन लक्ष्मी आकर्षण साधना शाबर मंत्र
धन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
इस मंत्र का प्रधान प्रयोजन घोर दरिद्रता का समूल नाश, वर्षों से रुके हुए या फंसे हुए धन की शीघ्र प्राप्ति, और चारों दिशाओं से आर्थिक समृद्धि (बंद धन खुलने) का निर्बाध मार्ग प्रशस्त करना है 5। योग-तंत्र
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस मंत्र का प्रधान प्रयोजन घोर दरिद्रता का समूल नाश, वर्षों से रुके हुए या फंसे हुए धन की शीघ्र प्राप्ति, और चारों दिशाओं से आर्थिक समृद्धि (बंद धन खुलने) का निर्बाध मार्ग प्रशस्त करना है 5। योग-तंत्र के गूढ़ विज्ञान के अनुसार, यह मंत्र केवल बाह्य लक्ष्मी का आवाहन नहीं करता, अपितु यह साधक के सूक्ष्म शरीर की 'ईड़ा', 'पिंगला', और 'सुषुम्ना' नाड़ियों को जाग्रत कर एक ऐसा प्रचंड चुंबकीय ऊर्जा-क्षेत्र (Magnetic Aura) उत्पन्न करता है जो लोहे को खींचने वाले चुंबक की भांति धन और अवसरों को अपनी ओर तीव्रता से आकर्षित करता है 5। गोरखनाथ की अमोघ आज्ञा और नाथ संप्रदाय की नाद-ऊर्जा साधक के भाग्य के अवरुद्ध द्वारों को तोड़कर, गंगा के अविरल प्रवाह और सूर्य के शाश्वत प्रकाश की भांति उसके जीवन में धन और समृद्धि का स्थायी वास सुनिश्चित करती है 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस मंत्र का प्रधान प्रयोजन घोर दरिद्रता का समूल नाश, वर्षों से रुके हुए या फंसे हुए धन की शीघ्र प्राप्ति, और चारों दिशाओं से आर्थिक समृद्धि (बंद धन खुलने) का निर्बाध मार्ग प्रशस्त करना है 5
योग-तंत्र के गूढ़ विज्ञान के अनुसार, यह मंत्र केवल बाह्य लक्ष्मी का आवाहन नहीं करता, अपितु यह साधक के सूक्ष्म शरीर की 'ईड़ा', 'पिंगला', और 'सुषुम्ना' नाड़ियों को जाग्रत कर एक ऐसा प्रचंड चुंबकीय ऊर्जा-क्षेत्र (Magnetic Aura) उत्पन्न करता है जो लोहे को खींचने वाले चुंबक की भांति धन और अवसरों को अपनी ओर तीव्रता से आकर्षित करता है 5
गोरखनाथ की अमोघ आज्ञा और नाथ संप्रदाय की नाद-ऊर्जा साधक के भाग्य के अवरुद्ध द्वारों को तोड़कर, गंगा के अविरल प्रवाह और सूर्य के शाश्वत प्रकाश की भांति उसके जीवन में धन और समृद्धि का स्थायी वास सुनिश्चित करती है
जाप विधि
योग और तंत्र के समन्वय पर आधारित इस अत्यंत शक्तिशाली नाड़ी-शोधन एवं लक्ष्मी आकर्षण शाबर मंत्र का नित्य प्रति कड़ाई से अभ्यास किया जाता है 5। साधक को अनिवार्य रूप से ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, स्नानादि से पवित्र होकर, पूर्व या उत्तर (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके बैठना चाहिए। ऊर्जा के संचरण हेतु पीला या लाल ऊनी आसन उत्तम माना गया है। पूर्ण श्रद्धा, अटूट विश्वास और एकाग्रता के साथ इस मंत्र का नित्य 40 बार स्पष्ट और लयबद्ध उच्चारण करना अनिवार्य है 5। इस जप के दौरान साधक का ध्यान केवल बाह्य धन पर नहीं होना चाहिए, अपितु उसे अपने सूक्ष्म शरीर के भीतर स्थित ईड़ा (बाईं नाड़ी), पिंगला (दाईं नाड़ी) और सुषुम्ना (मध्य नाड़ी) के जागरण का मानसिक ध्यान करना चाहिए 5। जब तक साधक की आर्थिक स्थिति में पूर्ण और स्थायी सुधार परिलक्षित न हो जाए, तब तक इस 40 पाठ के नित्य नियम को किसी भी परिस्थिति में खंडित नहीं करना चाहिए 5। तांत्रिक अंग अनुष्ठानिक उपयोग समय ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल) 5 दिशा एवं आसन पूर्व या उत्तर दिशा; लाल/पीला आसन आंतरिक ध्यान ईड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों का जागरण 5
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ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kaamya mantraश्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
beej mantraल्क्ष्मीं
navgrah mantraॐ लोहिताक्षाय विद्महे भूलाभाय धीमहि तन्नोऽङ्गारकः प्रचोदयात्।
stotra mantraया कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।। 28
vaidik mantraॐ हस्ताभ्यां दशशाखाभ्यां जिह्वा वाचः पुरोगवी । अनामयित्नुभ्यां हस्ताभ्यां ताभ्यां त्वाभि मृशामसि ॥