शरभेश्वर (शरभ) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ नाशय नाशय सर्व दुष्टं नाशय फट् स्वाहा अरुण वरुण माला लंकृता शंकराग्रे विद्रुत परसु शक्तिम पुष्प बाणुचापंम विविध फण फणंद्र भूषण भूषितंग शरबिलनाथं नौम्य सालुवे
भयंकर तंत्र प्रयोगों (नृसिंह जैसी उग्र ऊर्जा के अनियंत्रित प्रभाव) का उच्चाटन, भूत-प्रेत और ग्रह बंधनों से तत्काल मुक्ति 46।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भयंकर तंत्र प्रयोगों (नृसिंह जैसी उग्र ऊर्जा के अनियंत्रित प्रभाव) का उच्चाटन, भूत-प्रेत और ग्रह बंधनों से तत्काल मुक्ति 46।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर तंत्र प्रयोगों (नृसिंह जैसी उग्र ऊर्जा के अनियंत्रित प्रभाव) का उच्चाटन, भूत-प्रेत और ग्रह बंधनों से तत्काल मुक्ति
जाप विधि
हाथ में जल लेकर संकल्प लें। पक्षीराज शरभ के चरणों में मानसिक अर्पण करते हुए धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन कर पूर्ण श्रद्धा से जप करें। अंत में आसन के नीचे जल डालकर मस्तक पर लगाएँ 46।
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ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
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naam mantraशंकर
siddh mantraॐ सहस्रार हुं फट्
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा