ब्रह्म / मेधा सूक्त (३२.१६) वैदिक मंत्र
ॐ अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥
ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता
जाप विधि
बौद्धिक प्रतियोगिताओं या परीक्षाओं से पूर्व इष्ट-स्मरण करते हुए एक बार स्पष्ट उच्चारण।
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naam mantraत्र्यम्बक
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