ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
ब्रह्म / मेधा सूक्त (३२.१६)

ब्रह्म / मेधा सूक्त (३२.१६) वैदिक मंत्र

ॐ अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥

ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

ज्ञान की सर्वव्यापकता का बोध, रचनात्मकता (Creativity) का विकास एवं कला व विद्या में निपुणता

जाप विधि

बौद्धिक प्रतियोगिताओं या परीक्षाओं से पूर्व इष्ट-स्मरण करते हुए एक बार स्पष्ट उच्चारण।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

siddh mantra

ॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥

mool mantra

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

jap mantra

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्वविद्यां देहि दापय स्वाहा

gyan mantra

उद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥

kaamya mantra

ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥

kavach mantra

शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8