अग्नि, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१४) वैदिक मंत्र
ॐ यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक।
इस मंत्र से क्या होगा?
कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक
जाप विधि
विद्यारम्भ संस्कार अथवा नित्य अध्ययन से पूर्व पूर्व-दिशा की ओर मुख कर के ३ बार जप या घृत आहुति।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
mool mantraक्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा
stotra mantraस्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे । महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः
jap mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
gyan mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ॥