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उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१४)

अग्नि, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१४) वैदिक मंत्र

ॐ यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥

कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कुशाग्र बुद्धि की प्राप्ति, स्मरण-शक्ति का विकास, अध्ययन में एकाग्रता एवं सत्य-असत्य का विवेक

जाप विधि

विद्यारम्भ संस्कार अथवा नित्य अध्ययन से पूर्व पूर्व-दिशा की ओर मुख कर के ३ बार जप या घृत आहुति।

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