भगवान विष्णु नाम मंत्र
श्रीमन नारायण
धन, वैभव, कीर्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक उत्थान का एक साथ लाभ।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
धन, वैभव, कीर्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक उत्थान का एक साथ लाभ।
इस मंत्र से क्या होगा?
धन, वैभव, कीर्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक उत्थान का एक साथ लाभ
जाप विधि
सस्वर सामूहिक संकीर्तन या करताल के साथ वैखरी उच्चारण।
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गणेश शरणं शरणं गणेश
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
jap mantraॐ कार्तवीर्याय विद्महे महावीर्याय धीमहि तन्नोऽर्जुनः प्रचोदयात्
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17