वैदिक देवता (अग्नि) नाम मंत्र
वैश्वानर
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव।
इस मंत्र से क्या होगा?
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव
जाप विधि
उदर (पेट) की अग्नि का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
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ॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
tantrik mantraॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
mool mantraॐ निर्ऋतये नमः
stotra mantraयथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्। भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया। 7
gyan mantraमेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥
jap mantraॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा