वैदिक देवता (अग्नि) नाम मंत्र
वैश्वानर
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव।
इस मंत्र से क्या होगा?
जठराग्नि प्रदीप्त होना, अपच का नाश एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव
जाप विधि
उदर (पेट) की अग्नि का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः
mool mantraॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
gyan mantraप्रज्ञानम् ब्रह्म
kaamya mantraॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल-वारिण्यै गरुड़ वाहिन्यै श्रीं ह्रीं ऐं स्वाहा।
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8