पुरुष / पुरुष सूक्त (१०.९०.२) वैदिक मंत्र
ॐ पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भाव्यम् । उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति ॥
भूत, भविष्य और वर्तमान में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति एवं मोक्ष (अमृतत्व) की ओर गमन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
भूत, भविष्य और वर्तमान में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति एवं मोक्ष (अमृतत्व) की ओर गमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
भूत, भविष्य और वर्तमान में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति एवं मोक्ष (अमृतत्व) की ओर गमन
जाप विधि
देव-प्रतिमा स्नान, अभिषेक अथवा ध्यान के समय एकाग्र भाव से मन्द स्वर में जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
stotra mantraस वै न देवासुरमर्त्यतिर्यंग न स्त्री न षण्डो न पुमान न जन्तुः । नायं गुणः कर्म न सन्न चासन निषेधशेषो जयतादशेषः ॥ 4
naam mantraसोमनाथ
mool mantraॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः
jap mantraॐ कालभैरवाय नमः