माँ सरस्वती (ज्ञान-सिद्धि स्वरूप) ज्ञान मंत्र
सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने । विश्वरूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥
ब्रह्माण्ड में विद्यमान समस्त विद्याओं और सर्वोच्च ज्ञान-सम्पदा की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्माण्ड में विद्यमान समस्त विद्याओं और सर्वोच्च ज्ञान-सम्पदा की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्माण्ड में विद्यमान समस्त विद्याओं और सर्वोच्च ज्ञान-सम्पदा की प्राप्ति
जाप विधि
ज्ञान और शक्तियों की प्राप्ति हेतु श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ 4।
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ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
siddh mantraॐ सिं सिद्ध्यै नमः स्वाहा ।
tantrik mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
sabar mantraओम कलीम कामाख्या नजर तोड़े बंधन तोड़े बाधा तोड़े शत्रु की बुद्धि तोड़े ना तोड़े तो उमानंद भैरव की आन 17
naam mantraबुध
stotra mantraन विद्यते यस्य न जन्म कर्म वा न नाम रूपे गुणदोष एव वा । तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥ 4