ब्रह्मज्ञान (प्रज्ञानम् ब्रह्म) ज्ञान मंत्र
प्रज्ञानम् ब्रह्म
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध
जाप विधि
सर्वोच्च ज्ञान प्राप्ति के ध्येय से नित्य एकांत में निदिध्यासन (Meditation) 8।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
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