ब्रह्मज्ञान (प्रज्ञानम् ब्रह्म) ज्ञान मंत्र
प्रज्ञानम् ब्रह्म
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ज्ञान स्वरूप का बोध
जाप विधि
सर्वोच्च ज्ञान प्राप्ति के ध्येय से नित्य एकांत में निदिध्यासन (Meditation) 8।
विशेष टिप्पणियाँ
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अं ङं ञं णं नं मं
jap mantraॐ सिद्धि वराय नमः
mool mantraॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
kaamya mantraॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
beej mantraधां