माँ सरस्वती (गायत्री स्वरूप) ज्ञान मंत्र
ॐ वागीश्वर्यै विद्महे वाग्वादिन्यै धीमहि तन्नः सरस्वती प्रचोदयात् ॥
शिक्षा एवं करियर में अद्वितीय सफलता तथा प्रज्ञा का प्रकटीकरण 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शिक्षा एवं करियर में अद्वितीय सफलता तथा प्रज्ञा का प्रकटीकरण 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
शिक्षा एवं करियर में अद्वितीय सफलता तथा प्रज्ञा का प्रकटीकरण
जाप विधि
नित्य त्रिकाल संध्यावंदन के समय जप 4।
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं प्रत्यंगिरे सर्वदुष्टान प्राचं छिन्धि छिन्धि
siddh mantraक ए ई ल ह्रीं । ह स क ह ल ह्रीं । स क ल ह्रीं ॥
stotra mantraक्षीरोदन्वत्प्रदेशे शुचिमणिविलसत्सैकतेमौक्तिकानां मालाक्लृप्तासनस्थः स्फटिकमणिनिभैमौक्तिकैर्मण्डिताङ्गः। शुभ्रैरभ्रैरदभ्रैरुपरिविरचितैर्मुक्तपीयूष वर्षेः आनन्दी नः पुनीयादरिनलिनगदा शङ्खपाणिर्मुकुन्दः ॥ 10
vaidik mantraॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
naam mantraकपालिनी
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥