ज्ञान-तत्त्व / सवितृ देव (गायत्री विद्या) ज्ञान मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा 10।
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यह मंत्र क्यों?
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा 10।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा
जाप विधि
नित्य त्रिकाल संध्या में एकाग्रचित्त होकर जप 10।
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ॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥
jap mantraॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
stotra mantraदुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः। विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः।। 7
mool mantraॐ वराहाय नमः
tantrik mantraक ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं
siddh mantraॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात