ज्ञान-तत्त्व / सवितृ देव (गायत्री विद्या) ज्ञान मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा 10।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा 10।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण बुद्धि का प्रकटीकरण (Illumination of Intellect), मेधा-शक्ति की अपार वृद्धि और सत्य ज्ञान की प्रेरणा
जाप विधि
नित्य त्रिकाल संध्या में एकाग्रचित्त होकर जप 10।
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ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
jap mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
beej mantraक्रौं
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥