अग्नि देवता (मेधावी स्वरूप) ज्ञान मंत्र
यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य प्रातः पाठ तथा विद्या प्राप्ति के अनुष्ठानों में जप 2।
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ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय पराय परमपुरुषाय परात्मने परकर्म मन्त्र यन्त्र तन्त्र औषध विष आभिचार अस्त्र शस्त्र संहर संहर मृत्युर् मोचय मोचय । ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाय । ॐ प्रीं रीं रुँ दीप्त्रेय ज्वलापरीताय सर्वदिग्क्षोभनकाराय कारय हुं फट् परब्रह्मणे परमज्योतिषे स्वाहा ।
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naam mantraपरशुराम