उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि देवता (मेधावी स्वरूप)
अग्नि देवता (मेधावी स्वरूप) ज्ञान मंत्र
यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारज्ञान मंत्र
प्रयोजन
यह मंत्र क्यों?
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य प्रातः पाठ तथा विद्या प्राप्ति के अनुष्ठानों में जप 2।
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