अग्नि देवता (मेधावी स्वरूप) ज्ञान मंत्र
यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
देवताओं और पितरों के समान श्रेष्ठ मेधा और विलक्षण बुद्धिमत्ता की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य प्रातः पाठ तथा विद्या प्राप्ति के अनुष्ठानों में जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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अविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने । सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे ॥ 10
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kaamya mantraविधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
mool mantraॐ ह्रीं ह्रीं साफल्यायै सिद्धये ॐ नमः