भगवान गणेश (सामान्य मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
कार्य में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाओं का निवारण, नवीन कार्यों का निर्विघ्न आरंभ, आध्यात्मिक प्रबुद्धता एवं सर्वत्र सफलता की प्राप्ति 1।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कार्य में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाओं का निवारण, नवीन कार्यों का निर्विघ्न आरंभ, आध्यात्मिक प्रबुद्धता एवं सर्वत्र सफलता की प्राप्ति 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
कार्य में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाओं का निवारण, नवीन कार्यों का निर्विघ्न आरंभ, आध्यात्मिक प्रबुद्धता एवं सर्वत्र सफलता की प्राप्ति
जाप विधि
प्रातःकाल लाल आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से १०८ बार जप करें 1।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
gyan mantraमहो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
jap mantraश्री राम दूताय नम:
sabar mantraरक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10
beej mantraह्रौं
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥