ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
श्री कृष्ण (गोपाल स्वरूप)

श्री कृष्ण (गोपाल स्वरूप) ध्यान मंत्र

कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥

मन को सांसारिक विषयों से हटाकर भगवान के आनंदमय स्वरूप में लीन करना, जिससे चित्त में मधुरता, प्रेम और परम शांति का अनुभव हो।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मन को सांसारिक विषयों से हटाकर भगवान के आनंदमय स्वरूप में लीन करना, जिससे चित्त में मधुरता, प्रेम और परम शांति का अनुभव हो।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन को सांसारिक विषयों से हटाकर भगवान के आनंदमय स्वरूप में लीन करना, जिससे चित्त में मधुरता, प्रेम और परम शांति का अनुभव हो

जाप विधि

ध्यान आरंभ करने से पूर्व शांत चित्त होकर इस श्लोक का मानसिक श्रवण या पाठ करें। श्री कृष्ण के मस्तक पर कस्तूरी तिलक और होंठों पर बांसुरी वाले अति-सुंदर स्वरूप का पूर्ण तन्मयता से दर्शन करें।

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