भगवान सदाशिव (पंचवक्त्र त्रिनेत्र स्वरूप) ध्यान मंत्र
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
सभी अज्ञात भयों का शमन, चित्त की मलिनता को दूर कर प्रसन्नता की प्राप्ति, और शिव-तत्व से जुड़कर आध्यात्मिक एकीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी अज्ञात भयों का शमन, चित्त की मलिनता को दूर कर प्रसन्नता की प्राप्ति, और शिव-तत्व से जुड़कर आध्यात्मिक एकीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी अज्ञात भयों का शमन, चित्त की मलिनता को दूर कर प्रसन्नता की प्राप्ति, और शिव-तत्व से जुड़कर आध्यात्मिक एकीकरण
जाप विधि
पद्मासन में बैठकर भगवान शिव का कैलाश पर्वत के समान शुभ्र, भाल पर चंद्रमा, चार हाथों में अस्त्र व मुद्राएं धारण किए हुए तथा बाघाम्बर पहने हुए ध्यान करें। पूर्ण एकाग्रता के साथ इसका मानसिक पाठ करें।
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