भगवती चण्डिका काम्य मंत्र
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि) 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि) 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि)
जाप विधि
सकाम भाव से नित्य १ माला (१०८ बार) जप या सम्पुटित पाठ 28।
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श्री राम जय राम कोदण्ड राम
kavach mantraस्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
tantrik mantraॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा अस्त्राय फट्
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dhyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6