ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवती चण्डिका

भगवती चण्डिका काम्य मंत्र

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि) 28।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकाम्य मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि) 28।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि)

जाप विधि

सकाम भाव से नित्य १ माला (१०८ बार) जप या सम्पुटित पाठ 28।

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