भगवती नारायणी काम्य मंत्र
सर्वस्य बुद्धिरुपेण जनस्य हृदि संस्थिते। स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
इहलोक में सुखों को भोगकर मरणोपरांत स्वर्ग और परम मोक्ष की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इहलोक में सुखों को भोगकर मरणोपरांत स्वर्ग और परम मोक्ष की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
इहलोक में सुखों को भोगकर मरणोपरांत स्वर्ग और परम मोक्ष की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य रुद्राक्ष माला से देवी का ध्यान करते हुए जप 28।
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