राहु नवग्रह मंत्र
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।
भयंकर कालसर्प दोष, गुरु-चांडाल दोष, या ग्रहण दोष के कारण उत्पन्न अचानक दुर्घटनाओं, गंभीर मानसिक भ्रम (Phobias), अनिद्रा, कुष्ठ व त्वचा संबंधी असाध्य रोगों, झूठे मुकदमों, व्यसनों (Addictions) और अकारण
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
भयंकर कालसर्प दोष, गुरु-चांडाल दोष, या ग्रहण दोष के कारण उत्पन्न अचानक दुर्घटनाओं, गंभीर मानसिक भ्रम (Phobias), अनिद्रा, कुष्ठ व त्वचा संबंधी असाध्य रोगों, झूठे मुकदमों, व्यसनों (Addictions) और अकारण भारी धन हानि के शास्त्रसम्मत निवारण तथा विदेशी मामलों, राजनीति व कूटनीति में आकस्मिक सफलता हेतु। 1
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर कालसर्प दोष, गुरु-चांडाल दोष, या ग्रहण दोष के कारण उत्पन्न अचानक दुर्घटनाओं, गंभीर मानसिक भ्रम (Phobias), अनिद्रा, कुष्ठ व त्वचा संबंधी असाध्य रोगों, झूठे मुकदमों, व्यसनों (Addictions) और अकारण भारी धन हानि के शास्त्रसम्मत निवारण तथा विदेशी मामलों, राजनीति व कूटनीति में आकस्मिक सफलता हेतु
जाप विधि
शनिवार या शुक्रवार को रात्रिकाल में, आर्द्र, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा की ओर मुख करके अनुष्ठान आरंभ करें। काले या भूरे ऊनी आसन पर बैठकर गोमेद या रुद्राक्ष की माला से चालीस दिनों के भीतर अठारह हजार मंत्रों का जप पूर्ण करें। दूर्वा (दूब घास) और चंदन की समिधा से दशांश हवन का विशिष्ट विधान है। 20
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः जगत्प्रसूत्यै नमः
vaidik mantraॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
beej mantraरं