माता भगवती त्रिपुरसुंदरी भक्ति मंत्र
ॐ श्री त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
जीवन में संतुलन, आंतरिक सौंदर्य की अनुभूति, और देवी के प्रति सर्वोच्च वात्सल्य और भक्ति की प्राप्ति 45।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में संतुलन, आंतरिक सौंदर्य की अनुभूति, और देवी के प्रति सर्वोच्च वात्सल्य और भक्ति की प्राप्ति 45।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में संतुलन, आंतरिक सौंदर्य की अनुभूति, और देवी के प्रति सर्वोच्च वात्सल्य और भक्ति की प्राप्ति
जाप विधि
इस नाम-मंत्र का जप स्फटिक या लाल चंदन की माला पर किया जाता है 45। इसे एकांत में ध्यानस्थ होकर मानसिक रूप से जपना चाहिए, जिसमें देवी के सौंदर्य और करुणा का स्मरण हो 4।
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स्रीं
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
dhyan mantraॐ
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