भगवान श्री कृष्ण भक्ति मंत्र
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव
भगवान के विभिन्न मधुर और करुणापूर्ण नामों का एक साथ स्मरण कर मन की पूर्ण शांति प्राप्त करना, समस्त सांसारिक दुखों व चिंताओं का समूल नाश करना, और श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेमा भक्ति को हृदय में दृढ़
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भगवान के विभिन्न मधुर और करुणापूर्ण नामों का एक साथ स्मरण कर मन की पूर्ण शांति प्राप्त करना, समस्त सांसारिक दुखों व चिंताओं का समूल नाश करना, और श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेमा भक्ति को हृदय में दृढ़ रूप से स्थापित करना 9।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान के विभिन्न मधुर और करुणापूर्ण नामों का एक साथ स्मरण कर मन की पूर्ण शांति प्राप्त करना, समस्त सांसारिक दुखों व चिंताओं का समूल नाश करना, और श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेमा भक्ति को हृदय में दृढ़ रूप से स्थापित करना
जाप विधि
यह अत्यंत सरल, भावपूर्ण और गेय नाम-संकीर्तन है, जिसे बिना किसी माला, विशेष आसन या समय के कठोर बंधन के निरंतर गाया या जपा जा सकता है 9। भक्तिकालीन संत परंपरा में इसे सामूहिक रूप से उच्च स्वर में जपने का विधान है 1। एकांत साधना में इसे नेत्र बंद कर उपांशु (मंद स्वर) या मानसिक रूप से जपने से साधक का ध्यान अत्यधिक केंद्रित होता है 1।
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