भगवान श्री गणेश भक्ति मंत्र
जय गणेश जय जय गणनाता
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना 17।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना
जाप विधि
इसे सामूहिक भजन या कीर्तन के रूप में तालियों और वाद्य यंत्रों के साथ उच्च स्वर में (वैखरी जप) गाया जाता है 4।
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kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
jap mantraॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा
navgrah mantraॐ काश्यपाय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)