भगवान श्री गणेश भक्ति मंत्र
जय गणेश जय जय गणनाता
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना 17।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में उल्लास, सकारात्मकता और देव-स्तुति के माध्यम से समूह में भक्तिमय वातावरण का निर्माण करना
जाप विधि
इसे सामूहिक भजन या कीर्तन के रूप में तालियों और वाद्य यंत्रों के साथ उच्च स्वर में (वैखरी जप) गाया जाता है 4।
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ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
mool mantraक्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा
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naam mantraमुरारी
siddh mantraॐ श्लीं पशु हुं फट्
navgrah mantraॐ अश्वाध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।