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उद्देश्य अनुसार मंत्र
श्री राधा-कृष्ण (युगल स्वरूप)

श्री राधा-कृष्ण (युगल स्वरूप) भक्ति मंत्र

राधे कृष्ण राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण राधे राधे

श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण की निकुंज लीलाओं का स्मरण करना, हृदय की चरम शुद्धि करना, और प्रेमा भक्ति (सर्वोच्च दिव्य प्रेम) का निरंतर विकास करना 22।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण की निकुंज लीलाओं का स्मरण करना, हृदय की चरम शुद्धि करना, और प्रेमा भक्ति (सर्वोच्च दिव्य प्रेम) का निरंतर विकास करना 22।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण की निकुंज लीलाओं का स्मरण करना, हृदय की चरम शुद्धि करना, और प्रेमा भक्ति (सर्वोच्च दिव्य प्रेम) का निरंतर विकास करना

जाप विधि

इस युगल नाम-मंत्र का जप ब्रज परंपरा में बिना किसी कठोर नियम के उठते-बैठते, चलते-फिरते निरंतर किया जाता है 16। साधक इसे तुलसी माला पर या बिना माला के केवल भाव-जप के रूप में जप सकता है 18। इसके उच्चारण में प्रेम और विरह दोनों भावों का समावेश होना चाहिए 33।

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