इन्द्र, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१५) वैदिक मंत्र
ॐ मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजौ ॥
दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा।
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यह मंत्र क्यों?
दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा।
इस मंत्र से क्या होगा?
दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा
जाप विधि
ज्ञान-प्राप्ति हेतु घी अथवा ज्ञान-वर्धक औषधियों (जैसे ब्रह्मी) के सेवन से पूर्व मानसिक रूप से जप।
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