ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
इन्द्र, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१५)

इन्द्र, सरस्वती / मेधा सूक्त (३२.१५) वैदिक मंत्र

ॐ मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजौ ॥

दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

दैवी मेधा-शक्ति की प्राप्ति, आरोग्य के साथ बुद्धि का सामंजस्य, वाक्-शक्ति में तेज एवं मानसिक ऊर्जा

जाप विधि

ज्ञान-प्राप्ति हेतु घी अथवा ज्ञान-वर्धक औषधियों (जैसे ब्रह्मी) के सेवन से पूर्व मानसिक रूप से जप।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा

kaamya mantra

यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥

shanti mantra

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

dhyan mantra

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

mool mantra

ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः

stotra mantra

क्षीरोदन्वत्प्रदेशे शुचिमणिविलसत्सैकतेमौक्तिकानां मालाक्लृप्तासनस्थः स्फटिकमणिनिभैमौक्तिकैर्मण्डिताङ्गः। शुभ्रैरभ्रैरदभ्रैरुपरिविरचितैर्मुक्तपीयूष वर्षेः आनन्दी नः पुनीयादरिनलिनगदा शङ्खपाणिर्मुकुन्दः ॥ 10