बटुक भैरव (प्रत्यक्ष सिद्धि मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय
भगवान भैरव की प्रत्यक्ष कृपा व सिद्धि प्राप्त करना, जीवन के सभी संकटों से त्वरित मुक्ति एवं तंत्र बाधाओं का निराकरण 8।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भगवान भैरव की प्रत्यक्ष कृपा व सिद्धि प्राप्त करना, जीवन के सभी संकटों से त्वरित मुक्ति एवं तंत्र बाधाओं का निराकरण 8।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान भैरव की प्रत्यक्ष कृपा व सिद्धि प्राप्त करना, जीवन के सभी संकटों से त्वरित मुक्ति एवं तंत्र बाधाओं का निराकरण
जाप विधि
नाम जप (जैसे 'ॐ भैरवाय नमः') की ५ लाख संख्या पूर्ण होने के पश्चात् इस मूल मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला पर प्रारंभ किया जाना चाहिए, जिससे देवता से सीधा संपर्क स्थापित होता है 8।
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ॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12
ugra mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
siddh mantraश्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा ॥
naam mantraकेतु
navgrah mantraॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
jap mantraॐ गण गणपतये नमः