भगवान कृष्ण (अष्टाक्षर मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः
जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति 23।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति 23।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति
जाप विधि
प्रतिदिन प्रातः स्नानादि के पश्चात् तुलसी की माला पर १०८ बार पूर्व की ओर मुख करके जप करें। जप के समय भगवान के सगुण स्वरूप का स्मरण अनिवार्य है 23।
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