ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान कृष्ण (अष्टाक्षर मूल मंत्र)

भगवान कृष्ण (अष्टाक्षर मूल मंत्र) मूल मंत्र

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः

जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति 23।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति 23।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जीवन के समस्त मानसिक क्लेशों, चिंताओं व संकटों का समूल नाश, कार्मिक बंधनों का क्षय, आध्यात्मिक स्पष्टता, अहंकार का विसर्जन और भगवान कृष्ण के प्रति प्रगाढ़ प्रेम (भक्ति) की प्राप्ति

जाप विधि

प्रतिदिन प्रातः स्नानादि के पश्चात् तुलसी की माला पर १०८ बार पूर्व की ओर मुख करके जप करें। जप के समय भगवान के सगुण स्वरूप का स्मरण अनिवार्य है 23।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

shanti mantra

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ugra mantra

॥ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ॥

beej mantra

भ्रीं

kavach mantra

श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27

kaamya mantra

ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।

naam mantra

बलभद्र